साथ जिसको हमारा गवारा नहीं।
मैंने उसको कभी भी पुकारा नहीं।
अहमियत है तेरी ज़िंदगी में मेरी,
इसका मतलब तेरे बिन गुजारा नहीं।
खो गये जब से यादों में तेरी सनम,
दिल हमारा भी अब तो हमारा नहीं।
ओढ़ कर बस उदासी को बैठे है हम,
तू गया जब से खुद को सँवारा नहीं।
कब से बैठा हूँ आकर मैं दर पे तेरे,
अब तलक तेरा कोई इशारा नहीं।
चाँद हैरां क़मर भी परेशान है,
आसमां में भी तुझ सा सितारा नहीं।
बात सागर की जब से चली हर गली,
लोग कहते हैं इस सा दुलारा नहीं।
-डॉ.रामावतार सागर
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