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होली का रंग

                
                                                         
                            होली का रंग
                                                                 
                            

फागुन की बयार चले,
रंगों की फुहार चले,
गाँव की गलियों में गूंजे,
फिर हँसी की झंकार चले।

रंग गुलाल उड़े गगन में,
खुशबू घुली हवा के तन में,
बचपन फिर मुस्काए ऐसे,
सपने जागें हर मन में।

अबीर सजी है थालों में,
मस्ती है रस की प्यालों में,
राधा की चितवन बोले,
कान्हा के इन बेहालों में।

बूढ़े-युवा संग नाचे मन,
फिर से जागे मीठे क्षण,
रूठे भी गले लग जाएँ,
इस होली के पावन दिन।

गाँव की हो या शहर की होली,
रंगों की सरिता बहे ठिठोली,
प्रेम के गीत यहाँ गूंजें,
खुशियों की छेड़े बाँसुरी भोली।

तो आओ संग रंग में घुल जाएँ,
सब भेदभाव को भूल जाएँ,
यह पर्व हमें सिखाता है,
प्रेम का दीप जलाए जाएँ!
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एक वर्ष पहले

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