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हृदय विदारक पीड़ा

                
                                                         
                            दुनिया में तुम्हारी ऐ भगवन हमारे,
                                                                 
                            
यह क्या होता होता जा रहा है।
धर्म पूछ कर लोगों को पढ़ा, कलमा
इनको गोलियों से भूना जा रहा है।
सरे आम कर नंगा गुप्तांग देखकर
कर खड़ा पंक्ति में निशाना बनाया जा रहा है।
मात पिता पत्नी सन्तान के सम्मुख
निर्दोषियों को यो ढहाया जा रहा है।
नवविवाहित शैलानियों की अपूर्व खुशियों का,
हनीमून कैसा दर्दीला बनाया जा रहा है।
जिनके हाथों की मेहदी अभी मिट न सकी,
प्रथम लगा सिन्दूर पुछवाया जा रहा है।
पहलगाम की हो या फुलवामा की दरिन्दगी
सब कहीं आतंकियों का आतंक हावी होता जा रहा है।
कौन किससे पूछे सहारा मिले किसका कैसे,
आग शोलो के मध्य ठहाका लगाया जा रहा है।
ऐसे हृदय विदारक दर्द को सोंचो जरा,
भला कैसे कैसे कितना इनसे सहा जा रहा है।
कितना हो रहे हैं खुश दुष्ट दुष्टता का काम करते,
मानों कोई बड़ा उत्सव मनाया जा रहा है।
न कोई विवाद जाति धर्म का तुम्हारी तरफ से ,
तो फिर क्यों समाज को यो उलझाया जा रहा है।
मानवता का हृदय है जिसके उर अन्दर,
विपक्ष कारण तडफता न कर कुछ पा रहा है।
हे भगवन अब आप को क्या हो गया है,
जो ऐसे दृश्य पर भी कोई कदम न उठाया जा रहा है।
असहिष्णुता उड़ गई है क्या आज आपके मन से
जो आप द्वारा यह सब बरदास्त किया जा रहा है। कभी दीन दुःखियों की थे तुरन्त प्रकार सुनते,
नंगे पगन धाते थे सुना जा रहा है।
तो क्यों न अब आवश्यकता आ पड़ी पर,
हे नाथ अनदेखी अनसुनी किया जा रहा है।
अगर अब भी ध्यान न दोगे प्रभुवर हमारे,
तो क्या स्वयं के अस्तित्व पर कालिख लगाया जा रहा है।
या यों कहो जो भरोसा सदा रहा आप पर है,
उसे सदा सदा को हृदय से मिटाया जा रहा है।
पत्थर द्रवित हो रहे यह घिनौना दृश्य देख कर,
आपका मन मस्तिष्क क्यों न पसीज पा रहा है।
अपराध अपरमित देखदेख कर इनका
नील गंगन भी आँसू छलकाये जा रहा है।
अरे सरिता सागर पर नजर डालो जरा तुम
इनका जल स्तर बढ़ता बढ़ता जा रहा है।
बेचारे पीड़ित परिवारों के आसू सूख चुके हैं,
इनकी आहों से धरा का सीना फटा जा रहा है।
अत्याचारी अलगाववादी इनके हमदर्द आका
सब पर कहर आपका बन पा रहा है।
विपक्ष तो है अपराधियों से अपराधी ज्यादा
इसके खात्मे का क्यों न प्रबन्ध किया जा रहा है।
अरे कोई उपाय तो बताओ सद जन के सामने आप,
अविलम्ब मिटाओ कष्ट जो सदजन पा रहा है।
अब प्रार्थना हम सबकी सुनो हमारे नाथ ,
सिवा तुम्हारे रमन को अन्य हितैषी न पाया जा रहा है।
-रामकुमार जायसवाल रमन
 
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एक वर्ष पहले

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