माँ एक अनमोल ,मोती-सी माया है;
नसीब वाला हूँ मैं, कि आँचल माँ का पाया है।
हर पल तेरा साथ, ईश्वर दे नहीं सकता,
इसलिए तो उसने, माँ को बनाया है।।
क्या कोई धरा पर, उत्पन्न हुआ,
जिसने ममता के कर्ज ,को चुकाया हैं।।।
वो माँ ही है, जो बचपन में प्यार लुटाती थी,
आज वो बूढ़ी है,क्या तूने जल पिलाया हैं ।।।।
रात को आँखों से जब, नींद रूठ जाती थी,
लोरियां गा कर ,प्यार की थपकी, दे सुलाती थी।।।।।
तपकर दिनकर की गर्मी में, शीतल छाँव मे सुलाया है।।।।।
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