सिंहासन पर बैठा फिर भी,
सरहद का पहरेदार था।
दिल्ली में था, पर दिल उसका
बॉर्डर के उस पार था।
बुंदेले हरबोलों के मुँह
हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ा दुश्मन से वो,
वो भारत माँ का नेता था।
जब *पाकिस्तान* ने आँख दिखाई,
घर में घुसकर मारा था।
*सर्जिकल स्ट्राइक* का कहकर,
दुश्मन को ललकारा था।
*ऑपरेशन सिंदूर* से उसने
आतंकी अड्डे जलवाए थे,
खूब किया प्रहार वो तो,
वो भारत माँ का नेता था।
*चीन* ने जब धोखा देकर,
गलवान में वार किया।
निहत्थे ही टूट पड़े थे,
खून से इतिहास लिखा।
नेता ने तब हुक्म दिया -
"एक इंच न पीछे हटना है",
खूब लड़ा ड्रैगन से वो,
वो भारत माँ का नेता था।
रानी तो अंग्रेजों से लड़ी,
झाँसी के मैदान में।
ये *Quad और G-20* लेकर,
लड़ा विश्व के मैदान में।
*विदेश नीति* ऐसी बुनी,
दुनिया सिर झुकाती थी,
खूब बढ़ाया मान वो तो,
वो भारत माँ का नेता था।
*डोकलाम* से ले *लद्दाख* तक,
हर मोर्चे पर डटा रहा।
*आतंक पर जीरो टॉलरेंस*,
यही उसका मंत्र रहा।
*370* हटाकर उसने,
कश्मीर को अपनाया था,
खूब लड़ा अलगाव से वो,
वो भारत माँ का नेता था।
हथियार नहीं खरीदे उसने,
*मेक इन इंडिया* चलवाया था।
*तेजस, ब्रह्मोस, INS विक्रांत*,
दुश्मन को दिखलाया था।
"आत्मनिर्भर भारत" कहकर,
फौज का हाथ बढ़ाया था,
खूब लड़ा पराश्रय से वो,
वो भारत माँ का नेता था।
राकेश कहे सुनो दुनिया,
ये नया हिंदुस्तान है।
छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं,
ये नेता की जुबान है।
रानी ने तो झाँसी बचाई,
इसने पूरा देश बचाया है,
खूब लड़ा सरहद पर वो,
वो भारत माँ का नेता था।
-राकेश सिंह 'सुमित '
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