हिंदु मुस्लिम होने से पहले
बनें नेक इनसान रे बंदे
अलग खून का एक रंग है
अलग भले पहचान रे बंदे
जाति पाति का ढोल पीट के
कड़वा ज़हर घोलते क्यूँ हैं
एक आत्मा अलग देह में
एक खुदा भगवान रे बंदे।
अलग खून का एक रंग--।।
अलग राहें पर एक लक्षय हो
दहशत न बना हुआ भय हो
भय को खत्म करें सब आओ
बनना न शैतान रे बंदे।
अलग खून का एक रंग--।।
आओ हर दुख मिलजुल सह कर
प्रेम प्यार से रहना सीखें
बस इतनी सी बात मैं कहती
मिलजुल कर जलपान रे बंदे।
अलग खून का एक रंग--।।
मेरी अग़र न मानेगा तू
खुद को न पहचानेगा तू
फिर मंज़िल शमशान ही होगी
होना न अनजान रे बंदे।।
अलग खून का एक रंग--।।
-रजनीश गोयल
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