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नारी की महानता

                
                                                         
                                    "नारी की महानता"
                                                                 
                            

          नारी हूँ मैं सुलभा
        आदि से अंत जीवन मेरा
        स्वर्णिम युग की प्रतिछाया
   आदि युग से मैंने अपना परचम लहराया
     मान मेरा अभिमान मेरा स्वाभिमान
        कोई समझ न पाया मुझे
      पुराणों में सीता सती अनसुईया
    इतिहास के पन्नों में रानी लक्ष्मी बाई
     युगों युगों तक जिसकी वीर गाथा
      रानी पदमावती,रानी कमलापति
       गौरव शाली इतिहास इनका
      सरोजनी नायडू, महादेवी वर्मा
        बह रही रसधार जिनकी
   इन्द्रा गांधी ने बागडोर देश की सम्हाली
     आधुनिक युग में नारी मिला कर
      कंधे से कंधा साथ है चलती
     कितने परचम लहरा रही है नारी
     दिखा दिया है रूप स्वरूप अपना
      फिर भी आज दशा नारी की
   अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी
  आंचल में है दूध और आँखों में है पानी ।

    काव्य रचना -रजनी कटारे
      जबलपुर (म. प्र.)
             
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5 वर्ष पहले

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