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उन बातों में मैं हूँ तुम हो हम हैं

                
                                                         
                            यादों की गठरी में मेरी
                                                                 
                            
बंधी हुई बहुत सी बातें हैं
कुछ ना भी हो पास मेरे
संग बचपन की यादें हैं
उन बातों में मैं हूँ तुम हो हम हैं
और यादों के सुहाने मौसम हैं
धुंधली सी तस्वीरों में हमारी
कभी कभी आँखें भी नम हैं
उजली धूंप के सवेरे हैं उनमें
खिलखिलाते तारों की रातें हैं
कुछ ना भी हो पास मेरे राजीव
पर संग बचपन की यादें हैं
यादों की गठरी में मेरी
बंधी हुई बहुत सी बातें हैं
अक्सर खोलकर मैं गठरी
अपना दिल बहलाता हूँ
खूब बातें करता हूँ ऐसे
जैसे तुमसे ही बतलाता हूँ
ऐसे में दूरी का मुझको
होता कभी अहसास नहीं
बंद करके पलकें अपनी
पा लेता हूँ तुम्हें पास यहीं
दुआओं भरे दिल में मेरे
स्नेह भरी सौगातें हैं
कुछ ना भी हो पास मेरे
संग बचपन की यादें हैं
यादों की गठरी में मेरी
बंधी हुई बहुत सी बातें हैं
उन बातों में मैं हूँ तुम हो हम हैं
और यादों के सुहाने मौसम हैं
- राजीव त्यागी

 
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19 मिनट पहले

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