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पुन: उसी प्रजापालक भूपति कृष्ण का

                
                                                         
                            हे चक्रधर, कुचक्र हैं चहुँ ओर,
                                                                 
                            
चक्र चाहिए,
हे राधिका प्रिय, प्रदर्शन हुए विभत्स,
सुदर्शन चाहिए,
हरण हो रहा धरा के चीर का प्रतिपल
निशिदिन,
पुन: उसी प्रजापालक भूपति कृष्ण का
अवतरण चाहिए.

 
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एक घंटा पहले

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