मुहब्बत जो मैख़ाने में मय से हुई,
सुबह तक उतर जायगी,
मुहब्बत जो क़िताब से हो गई,
ज़िन्दगी भर निभ जाएगी,
जहालत, ज़िना, जंग और ज़िद
हमेशा रहे इश्क़ के दुश्मन,
मुहब्बत जो इंसान ने इंसान से की,
तो ज़मीं रोशन हो जाएगी.
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