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पूरे आकाश का उजला होना आवश्यक नहीं।

                
                                                         
                            मेरे अल्फ़ाज
                                                                 
                            

अँधेरा कितना भी गहरा हो,
प्रकाश की संभावना को
समाप्त नहीं कर सकता।

क्योंकि उजाला
सिर्फ़ सूरज में नहीं होता,
वह उस विश्वास में भी पलता है
जो बंद दरवाज़ों के पीछे
भोर की आहट सुन लेता है।

रात चाहे
आकाश के अंतिम छोर तक फैल जाए,
एक छोटी-सी किरण
उसके साम्राज्य को चुनौती देने के लिए
काफ़ी होती है।

हर बुझा हुआ दीप
अंत नहीं होता,
कभी-कभी उसकी राख में भी
एक अगली लौ
चुपचाप जन्म ले रही होती है।

इसलिए
जब रास्ते दिखाई न दें,
तब रास्तों पर नहीं—
अपने भीतर देखना;
क्योंकि उम्मीद
वह प्रकाश है
जो आँखों से पहले
आत्मा को रास्ता दिखाता है।

अँधेरा चाहे कितना भी गहरा हो,
प्रकाश की संभावना को
समाप्त नहीं कर सकता—
क्योंकि एक किरण के जन्म के लिए
पूरे आकाश का उजला होना आवश्यक नहीं।
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3 hours ago

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