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हिंदी भारत की ह्रदय वाहिनी

                
                                                         
                            संस्कृत के निर्मल निर्झर से प्रवाहित ,
                                                                 
                            
संस्कृति की अविरल धारा है ,
हिन्दी भारत की ह्रदय वाहिनी है ,
ये ही सुरों की अनन्त रागिनी है ,
जन जन की यह भाषा बनकर ,
देश का अलंकार सी बन जाती है ,
सरलता , सुगमता ही विशेषता ,
श्रंगार भी है अत्यंत उज्ज्वल ,
शब्द श्रंखला करती है विवश ,
योगियों के मौन भी टूट जाते हैं ,
नए शब्द समूह बन जाते हैं ,
प्रभात सा नव सृजन कर जाते हैं ,
भारतीय विपणन का आधार है हिन्दी ,
कृत्रिम मेधा की ओर भी बढ़ चली है ,
विश्व की तीसरी भाषा है हिन्दी ,
माँ भारती के ललाट की बिंदी है हिन्दी |
-राजेश शर्मा 
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एक घंटा पहले

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