आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

किसान

                
                                                         
                            मैं हूँ भोला-भाला किसान
                                                                 
                            
जो हरदम कहता मेरा भारत महान

नहीं चाहता मैं बंगला-कार
सिर्फ़ दे दो मुझको मेरे अधिकार

किसानों की आत्महत्या की खबरो से पटे पड़े अखबार
कर्जमाफी को फैसन बताते नायडू,सो रही भारत सरकार

अन्नदाता कहलाता हूँ
पर दो जुन की रोटी खुद चैन से नहीं खा पाता हूँ

प्रधान सेवक से कुछ उम्मीद लगाई थी
देखकर उनकी भी अनदेखी मैने गोली खाई थी

किसान-पुत्र हीं देश रक्षा मे गवा देते अपने प्राण
इसलिये बना रहा और बना रहेगा हमारा देश महान

देखकर-सुनकर भी किसानो की पीडा
नागर,कोई क्यो नहीं उठाता उनके उद्धार का बीड़ा

-राजेश नागर

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।

 
8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर