सावन से दीवाली तक
सावन में थी हरियाली छाई
मिट्टी ने भी खुशबू पाई
किसानों ने हल उठाया
सुंदर धरा ने काली घटाओं का लुत्फ उठाया
भादों ने मेघों को बुलाया
जमकर मेघों ने पानी बरसाया
चेहरों पर किसानों के मुस्कान है छाई
शीतल समीर सबके मन को भाई
आश्विन में पुरखों के लिए थाली सजाई
जिन्दा रहते जिन्हें कभी एक रोटी नहीं खिलाई
नौ दिन व्रत करके माता को मनाया
लगा जलता हुआ रावण सबको प्यारा
लादकर धान गाड़ियों में किसानों ने आराम फरमाया
ग्रह लक्ष्मी ने घर को भांति भांति से सजाया
दीवाली आई खुशियों के साथ मीठी मीठी ठंड भी लाई
लोगों ने तरह तरह की मिठाई है खाई
पटाखों के साथ बच्चों ने फुलझड़ियां भी जलाई
महिलाओं ने थक हार कर निकाली है रजाई
दीपावली को दियों के साथ मनाया
पूरा गांव पीली रोशनी से जगमगाया
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