आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

खुशहाली की राह

                
                                                         
                            
जीवन है एक अनसुलझी पहेली,
उलझे सूत सुलझाकर तो देखो,
जहां फूल,वहां कांटा संभावित,
गम में दामन सजा कर तो देखो,
फूलों से सजी संवरी सेज पर तो,
हंसते मुस्कराते है यहां बहुत लोग,
कंटकाकीर्ण त्रासद ताज पहनकर,
खुशहाली का सरोकार तो देखो,
बारिश उपरांत दिखता है इंद्रधनुष,
भीगे मोर को नाचते हुए तो देखो ,
कुछ असम्भव नहीं मनुष्य के लिए,
इच्छाशक्ति उत्पन्न करके तो देखो !

- राजेश कुमार कौशल
हमीरपुर , हिमाचल प्रदेश
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर