तुम औरत हो अदब में रहा करो
जब तुम बात करती हो तो
थोड़ी नीचे आवाज़ में किया करो
जब तुम सड़क पर चला करो
तो आंखों को नीचे किया करो
जब तुम शहर में हो तो
बात कम किया करो
जब तुम शादी में हो तो
कम हँसा करो
जब तुम किसी के साथ हो तो
मेकअप कम किया करो
जब तुम आदमियों के बीच में हो तो
सिर को झुका कर खड़ी हुआ करो
ना कुछ बोला करो
ना कुछ ज्यादा सुना करो
तुम औरत हो अदब में रहा करो
तुम से कोई कुछ कहें दे तो
बस घर में बैठ कर रो लिया करो
तुम औरत हो अदब में रहा करो
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
कमेंट
कमेंट X