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उन्होंने ही हमें तोड़ दिया!!

                
                                                         
                            #मेरे_मन_की_आवाज
                                                                 
                            
"हमने खुद को फल समझा था,
उन्होंने केवल रस समझा।
"जब तक स्वाद था, पास रहे,
स्वाद गया तो विष समझा।
"नींबू की तरह निचोड़ लिया,
केले-सा छिलका छोड़ दिया,
"जिनके लिए हम घुले-गले,
उन्होंने ही हमें तोड़ दिया!!
 
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2 घंटे पहले

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