#मेरे_मन_की_आवाज
"हमने खुद को फल समझा था,
उन्होंने केवल रस समझा।
"जब तक स्वाद था, पास रहे,
स्वाद गया तो विष समझा।
"नींबू की तरह निचोड़ लिया,
केले-सा छिलका छोड़ दिया,
"जिनके लिए हम घुले-गले,
उन्होंने ही हमें तोड़ दिया!!
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