वो अनजान है मेरी इस बेचैनी से,
वो बेखबर है मेरी हर रात से....
मैं हर दुआ में उसी को मांग लेता हूँ,
और फिर दुआ के बाद खुद ही डर जाता हूँ!
कि अगर उसे पता चला तो क्या! सोचेगी,
क्या इस पागल दिल का हाल समझेगी ?
इसलिए रहने दो, ये राज़ राज़ ही रहने दो,
मुझे उसकी यादों में ही आबाद रहने दो।
-अर्णव
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