उसके लफ्ज़ों का नशा कोई हम से पूछे ?
जब वो बोलती है,तो रूह काँप सी जाती हैं ।
न शराब, न जाम, बस उसकी बातें.......?
वो हँसती है ,तो रूह तक बहक जाती है।
-अर्णव.....
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X