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बुरे वक़्त में ए- साया भी बेवफ़ा हो जाता है। कभी-कभी खुद का वजूद भी ख़फ़ा हो जाता है।

                
                                                         
                            बुरे वक़्त में ए- साया भी बेवफ़ा हो जाता है।
                                                                 
                            
कभी-कभी खुद का वजूद भी ख़फ़ा हो जाता है।।
तन्हाई में एहसास-ए-ग़म भी गहरा हो जाता है।
हर शख़्स यहाँ मतलब से अपना हो जाता है।।
जो कहते थे ,कि मिलेंगे हर मोड़ पर तुम्हें ।
वही वक़्त-ए-मुश्किल में जुदा हो जाता है।।
-अर्णव...
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21 घंटे पहले

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