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अपना दर्द....

                
                                                         
                            हम अपना दर्द बया नही कर सकतें!
                                                                 
                            
फँस गए है,इन शहर की गली और बुचो में.. ?
दोड़ते रहतें है!घोड़ों की तरह खाने को मिलता है
जरा सा - जला सा और दरा सा, बन जाते है !
मुँह के आठ कोने,रोने को नही मिलते कोने ...!
हर कोने में बैठें हैं,सोने और मोने...!
-अर्णव.....
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2 घंटे पहले

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