विचारों से भाग्य तक
अपने विचारों पर ध्यान देना,
क्योंकि विचार ही शब्द बन जाते हैं,
और शब्दों के रूप में निकलकर
किसी के हृदय में उतर जाते हैं।
अपने शब्दों पर ध्यान देना,
क्योंकि शब्द ही कर्म बन जाते हैं,
कभी मरहम बनकर घाव भरते हैं,
तो कभी अपनों को ही छल जाते हैं।
अपने कर्मों पर ध्यान देना,
क्योंकि कर्म ही संस्कार बनाते हैं,
आज जो बीज तुम बोते हो,
कल वही फल बनकर आते हैं।
हर विचार की अपनी शक्ति है,
हर शब्द का अपना प्रभाव है,
हर कर्म की अपनी गवाही है,
प्रकृति के पास हर प्रश्न का जवाब है।
इसलिए विचारों को पवित्र रखना,
शब्दों में मिठास बनाए रखना,
कर्मों में सच्चाई को जगह देना,
और अपने चरित्र को निर्मल रखना।
क्योंकि विचारों से शब्द,
शब्दों से कर्म बनते हैं,
और इन्हीं कर्मों के आधार पर
भाग्य के नए अध्याय लिखे जाते हैं।
— रजनी
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