वाह रे तेरी माया
जीवन की कहानी देखकर
चीख-चीखकर हँसने को मन करता है,
क्या रे ज़ालिम, तेरा भी करता है?
नहीं!
तू तो डर-डरकर जीता है,
कहीं तेरी चाल किसी को पता न चल जाए,
कहीं खुल न जाए
कि तूने कभी चीटिंग की थी।
लेकिन मेरा तो
अब चीख-चीखकर हँसने को मन करता है।
पहले डर लगता था—
मेरी हँसी देखकर
कोई मुझे पागल न कह दे,
अब वो डर भी मर गया,
इसलिए खुलकर, ज़ोर से हँसने को मन करता है।
प्रभु!
तूने रुलाया तो बहुत था,
लेकिन उन आँसुओं के पीछे
हँसी के फव्वारे छिपे थे,
ये कहाँ पता था!
आज पीछे मुड़कर देखती हूँ
तो हर दर्द पर हँसी आती है,
हर धोखा एक कहानी लगता है,
और हर आँसू
तेरी किसी अनदेखी लीला का हिस्सा।
वाह रे प्रभु,
तेरी भी क्या माया है—
रुलाया बहुत,
पर उन्हीं आँसुओं में
हँसी का सागर छिपाया है।
— रजनी
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