तुम्हारा न रूठना ठीक है
प्रेम में विष मिले तो घूँट लेना ठीक है,
पर दिल तुम्हारा कभी न टूटना ठीक है।
दिल तो उसी को दिया था कभी,
अब इस दिल को भी न रोकना ठीक है।
देवता रूठ जाएँ तो रूठे रहें,
पर तुमसे मेरा कभी न रूठना ठीक है।
चाहे प्रेम राह में दर्द ही क्यों न दे,
उस दर्द को हँसकर सहना ठीक है।
तुम खुश रहो, बस यही दुआ है मेरी,
तुम्हारे लिए खुद को भूलना ठीक है।
— रजनी
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