सत्य के प्रति कट्टरता
कट्टरता बहुत अच्छी चीज़ है,
यदि सत्य के प्रति की जाए,
झूठ के आगे सिर न झुके,
चाहे कितनी भी मुश्किल आए।
रिश्ते रूठें, दुनिया छोड़े,
पर सत्य का साथ न छूटे,
लाभ मिले या हानि जीवन में,
सच्चाई से कदम न हटे।
कट्टर बनो तो सत्य के बनो,
अपने सिद्धांतों के बनो,
झूठ के आगे झुकने वालों में
नहीं, सत्य पर अड़ने वालों में बनो।
क्योंकि सत्य की राह कठिन सही,
पर अंततः वही सम्मान दिलाती है,
जो आत्मा को सत्य के आगे झुका दे,
वही कट्टरता सार्थक कहलाती है।
— रजनी
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