सच की एक हुंकार
सच की एक हुंकार,
सदियों पुराने महलों की नींव हिला देती है,
झूठ चाहे कितना भी मजबूत हो,
सच्चाई उसे आईना दिखा देती है।
सच को दबाने की कोशिशें
भले ही वर्षों तक चलती रहें,
मगर एक दिन उसकी आवाज़
हर दीवार के पार निकल जाती है।
सच अकेला हो सकता है,
मगर कमजोर नहीं,
उसकी एक पुकार ही
बड़े-बड़े साम्राज्यों की नींव हिला देती है।
-रजनी
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