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प्रेम की अधूरी तलाश

                
                                                         
                            प्रेम की अधूरी तलाश
                                                                 
                            

प्रेम में कष्ट के सिवा
किसी को कुछ नहीं मिला,
फिर भी इंसान प्रेम ही चाहता है—
यहाँ नहीं तो कहीं और सही।

शायद प्रेम की चाह
कभी पूरी नहीं होती,
क्योंकि प्रेम जितना मिलता है,
उतनी ही प्यास बढ़ती जाती है।

प्रेम में इंसान तब खुश होता है,
जब वह किसी को कुछ दे पाता है,
और अहंकार में तब खुश होता है,
जब वह किसी से कुछ ले पाता है।

प्रेम में सुख है
किसी को सुख देने का,
और अहंकार में सुख है
किसी को दुख देने का।

अजीब है इंसान भी—
दुख प्रेम से पाता है,
दुख अहंकार से देता है,
फिर भी पूरी जिंदगी
प्रेम की तलाश में लगा रहता है।
— रजनी
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20 मिनट पहले

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