मोहब्बत की नज़र
मोहब्बत में रहकर कोई दूसरा खूबसूरत लगे,
तो लानत हो ऐसी नज़रों पर,
जो अपने ही प्यार में खूबसूरती न देख सके।
इश्क़ अगर सच्चा हो,
तो नज़रें भटकती नहीं,
दिल किसी और को चाहता नहीं।
जिसके साथ दिल जुड़ जाए,
फिर दुनिया में कोई और अच्छा लगे—
तो मोहब्बत नहीं,
सिर्फ़ एक समझौता है उस रिश्ते से।
— रजनी
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