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जीवन तो बस पल-पल का है

                
                                                         
                            एक पल की भूल
                                                                 
                            

घड़ी गई, थोड़ी रही,
या मैं पल-पल जाए,
एक पलक की चूक से,
क्यों जीवन पर कलंक लग जाए?

जिस मान को बनाने में,
उम्र सारी बीत जाए,
क्या पता एक क्षण की भूल,
सब कुछ मिट्टी में मिलाए।

पल भर का आवेश कहीं,
वर्षों का धैर्य न खो जाए,
एक क्षण की नादानी में,
अपना ही अस्तित्व न मिट जाए।

समय के माथे पर लिखी,
हर भूल कहाँ मिट पाती है,
कुछ दाग़ ऐसे होते हैं,
जिन्हें उम्र भी धो नहीं पाती है।

इसलिए ऐ मन! ठहर ज़रा,
हर निर्णय से पहले सोच,
क्षणिक सुख की चाह में कहीं,
जीवन भर का दुख न ओढ़।

जीवन तो बस पल-पल का है,
पर कर्मों की छाप रह जाती है,
एक पल की चूक कभी-कभी,
पूरी उम्र पर भारी पड़ जाती है।
— रजनी
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3 घंटे पहले

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