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जहाँ उसकी असली पहचान होती है।

                
                                                         
                            जिन लोगों को ईश्वर ने हृदय और परख दी है,
                                                                 
                            
वे आदमी की पोशाक नहीं देखते,
वे उसके गुण और चरित्र देखते हैं।

किसी की शक्ल और रंग-रूप में
उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं होती,
वे तो इंसान के भीतर झाँकते हैं,
जहाँ उसकी असली पहचान होती है।

चेहरा तो समय के साथ ढल जाता है,
रंग-रूप भी एक दिन मिट जाता है,
पर अच्छे कर्म और सच्चा चरित्र
इंसान के जाने के बाद भी याद आता है।
— रजनी
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एक घंटा पहले

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