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बुद्धि का अहंकार

                
                                                         
                            बुद्धि का अहंकार
                                                                 
                            

उच्च स्तर की बुद्धि
हर बार इंसान को महान नहीं बनाती,
कभी-कभी वही बुद्धि
उसे समाज से दूर भी कर देती है।

जब इंसान को लगने लगे
कि उससे ज्यादा कोई जानता ही नहीं,
उसकी सोच से बेहतर
किसी की सोच हो ही नहीं सकती,
तब ज्ञान धीरे-धीरे
अहंकार का रूप लेने लगता है।

वह लोगों को समझना छोड़ देता है,
सिर्फ उन्हें परखता रहता है,
हर रिश्ते में कमी खोजता है,
हर बात में अपनी श्रेष्ठता देखता है।

फिर भीड़ में रहकर भी
वह अकेला होता जाता है,
लोग उसके पास होते हैं,
मगर उससे दूर होते जाते हैं।

क्योंकि इंसान को
सिर्फ बुद्धि नहीं,
समझ और संवेदना भी चाहिए।

बहुत ऊँची बुद्धि
अगर विनम्रता खो दे,
तो इंसान को समझदार नहीं,
असामाजिक बना देती है।
-रजनी
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एक घंटा पहले

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