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भ्रम से बाहर

                
                                                         
                            भ्रम से बाहर
                                                                 
                            

वक़्त रहते
भ्रम की दुनिया से निकल जाना भी
अपने किए गए कुछ अच्छे कर्मों का फल होता है,

हर किसी को
सच समय रहते दिखाई नहीं देता,
कभी-कभी आँखों पर पड़ा पर्दा
उठाने के लिए भी
ईश्वर की कृपा चाहिए होती है।

जिसे हम अपना समझकर
वर्षों तक थामे रहते हैं,
एक दिन वही भ्रम टूटता है
और सच सामने खड़ा होता है।

उस क्षण का दर्द भले ही गहरा हो,
लेकिन उसी दर्द में
एक नई दृष्टि जन्म लेती है—
कि हर खोना नुकसान नहीं होता,
कुछ चीज़ों से मुक्त होना भी
ईश्वर का दिया हुआ वरदान होता है।

और शायद यही
हमारे अच्छे कर्मों का फल है—
कि देर होने से पहले
हमें सच दिखाई दे जाए,
और हम भ्रम से निकलकर
अपने वास्तविक जीवन की ओर लौट आएँ।
-रजनी
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5 घंटे पहले

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