बेटियों को सही परवरिश देना
बेटियों को ऐसी परवरिश देना,
कि वे स्वयं का सम्मान करना सीखें,
अपने तन से पहले अपने मन को,
अपने रूप से पहले अपने गुण को परखना सीखें।
उन्हें बताना,
कि देह सुंदर होना ही सुंदरता नहीं,
चेहरे पर निखार होना ही योग्यता नहीं,
रूप तो समय के साथ ढल जाता है,
मगर ज्ञान और चरित्र का तेज़
उम्र के साथ और निखर जाता है।
उन्हें ज्ञान का महत्व समझाना,
गुड़-सा मीठा व्यवहार सिखाना,
कौशल से अपने पंख सजाना,
चरित्र से अपनी पहचान बनाना,
और बल से हर मुश्किल से टकराना।
उन्हें यह भी बताना,
कि वे किसी की नज़रों में उतरने के लिए नहीं,
अपनी नज़रों में उठने के लिए जन्मी हैं,
किसी की पसंद बनना ही लक्ष्य नहीं,
उन्हें अपनी पहचान स्वयं गढ़नी है।
देह पर अभिमान नहीं,
न ही देह को तुच्छ समझना है,
बस उसे अपने अस्तित्व का
एक छोटा-सा हिस्सा समझना है।
बेटियों को इतना सशक्त बनाना,
कि रूप के लोभी उन्हें परख न पाएँ,
उनके ज्ञान, गुण और सामर्थ्य के आगे
दिखावे के सारे मापदंड छोटे पड़ जाएँ।
— रजनी
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