बेपनाह ख्वाहिश
मैं मर भी जाऊँ तो
एक बात याद रखना,
मुझे तुम्हारे साथ
ज़िंदगी गुज़ारने की
बेपनाह ख्वाहिश थी।
तुम्हारे साथ हँसना था,
तुम्हारे साथ रोना था,
ज़िंदगी के हर मोड़ पर
बस तुम्हारा हाथ थामे
चलते रहना था।
शिकायतें थीं तुमसे,
मगर मोहब्बत उससे कहीं ज़्यादा थी,
तुम समझ न सके शायद,
पर मेरी हर दुआ में
सिर्फ़ तुम्हारी ही जगह थी।
अगर कभी मेरी कमी महसूस हो,
तो बस इतना याद रखना—
मैंने तुमसे कुछ माँगा नहीं था,
बस तुम्हारे साथ
पूरी ज़िंदगी जीने की
एक बेपनाह ख्वाहिश थी।
— रजनी
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