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समझाइश

                
                                                         
                            ख़ुद का कहा मानना...
                                                                 
                            
सीखना पड़ेगा

तभी वजूद
कुछ ठोस, कुछ नर्म होता दिखेगा

आ जाएंगे दोस्त...
राहुल सब्र रख लो!

बदल जाएंगे बोल...
अभी के लिए सुन लो

क्या है छोटा-सा आज का लक्ष्य मेरा?

रहता रहे अक्स, अगर हो संग-ए-मरमर सा

लाओ, और बहसबाज़ियों से... तरबतर कर दो... दिल मेरा

जो-जो चीज़ें सता रहीं हैं, सबसे पहले, उन्हीं के संग रखो दंगल मेरा!

पता चले कौन
कायर है यहां



.
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एक घंटा पहले

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