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नहीं कहीं जातीं मेरे चाहने से...

                
                                                         
                            प्यास को लगे
                                                                 
                            
पाने में

हर लफ़्ज़ लिखने
उनसे पूछने जाते :(

दूर होना
इतना कठिन क्यों हो रहा है?

मैने रोग
क्योंकि जड़ से नहीं खतम किया है?

घबराहट
अपने कल को लेकर

चौराहे से,
ज़्यादा दूर नहीं अब डगर

जब शांति है
तब शोरगुल चाहिए 

एकांत के फूल
मैंने शूल बना लिए

हुस्न वालों में
तो बिलकुल सादगी नहीं!

ना बंदे की बंदगी रह पाती
दांत और चियारती तिश्नगी

नहीं किसी काम की बातें यें...

नहीं कहीं जातीं मेरे चाहने से...

-राहुल



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56 मिनट पहले

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