किसी को
क्या समझाएं
क्यों हम
सबको मन में बसाए
भगवान
मुझे समझ नहीं आ रहा है
खींचातानी में
सारा समय जा रहा है :(
अनिश्चितता का
इतना लंबा समय थोड़ी ना होता है?
भाग्य से बोलो, थोड़ी देर के लिए उठ जाए
फिर सोता रहे...
उसे चाहे जितना सोना है...
मेरी
उलझन सुलझा दो
ऐसे
दूरी... कम बना दो
मैं,
सब्र रखने को तैयार हूं!
थोड़ी
आपके रहम की भी बरसात हो...
-राहुल
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