माधव अब तो आ जाओ ना,
मुझे गीता सार सुना दो ना।
मन में है विकल कुंठा सी ,
मनमोहक छवि दिखा जाओ ना।।
अर्जुन सा भटका हुआ हूं,
रथ मेरा भी रुका हुआ है।
सारथी बनके अब तो माधव,
मुझे अपनी राह दिखा जाओ ना।।
ज्ञान दो ऐसा हे केशव,
मैं कर्ता नहीं, निमित्त बन जाऊं।
जीत-हार सब तुम पर छोड़ूं ,
बस अपना धर्म निभा जाऊं।।
मोह-माया का बंधन त्याग,
नित्य करूँ मैं तेरा प्रणिपात।
तू ही है मेरे जीवन का आधार,
हे मेरे कृष्ण, गोविंद गोपाल,
इस सृष्टि के पालनहार।।
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