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जीत कर भी जो हार गया

                
                                                         
                            मासूमों के अरमानों को
                                                                 
                            
रौंदकर अपने पैरों तले। 
राज किया इस जहाँ पर,
क्या वही सिकंदर हो तुम?
हाँ शायद...  वही हो तुम। 

थक-हार सोए हुए थे हम,
उसी मिट्टी में दफ़्न हुए तुम।
राज किया इस जहाँ पर,
क्या वही सिकंदर हो तुम?
हाँ शायद...  वही हो तुम।

ओढ़कर बेबसी की चादर,
जनाज़े में रहे ख़ाली हाथ।
राज किया इस जहाँ पर,
क्या वही सिकंदर हो तुम?
हाँ शायद...  वही हो तुम।

लाखों फ़ौजी अकूत दौलत,
जीत के भी जो हार गया। 
क्या वही सिकंदर हो तुम?
मुक़द्दर का सिकंदर वहीं हैं
जिसने तुझे बनाया सिकंदर।

 
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51 मिनट पहले

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