एक मुद्दत से प्यासी है मेरी रूह तेरे लिए
मेरे दिल के आईने में, एक तेरी ही तस्वीर है
कुछ मायने नही रखता मेरा जीना तेरे बिन
मेरा हसना, रोना, गाना, तेरी ही जागीर है
किसी से कुछ मांगा नहीं,
हमेशा खुद को राजा समझा
बस एक तेरे लिए ये बन्दा फकीर है
खुला ना छोड़ो अपनी जुल्फों को इस कदर
मेरी तमन्ना इसमें जकड़ जाती है
तेरी ये काली जुल्फे मेरे लिए जंजीर है
मैं हर बार घायल हो जाता हूं
तेरे इन कातिल नैनों से
मुझको हर बार निशाना बनाते हैं
तेरे नैनों को जो तीर हैं
चाहत की जो आग लगी हैं,
जाने कब बुझेगी
तूने ही इन आंखों में आंसू दिए है
दिल में तेरी ही पीर है
एक दिन के सिवा कुछ नहीं हैं अमन के पास
जो है उसके पास लेकर तेरे दरबार में हाजिर हैं
-रविन्द्र अमन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X