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फिर से हम बनाएंगे अपने देश को महान

                
                                                         
                            अमर उजाला के मंच पर हो रहा मुशायरा
                                                                 
                            
देख के सब शायरों को दिल मेरा खुशियों से है भरा

इस महफिल में खिले है कितने रंग बिरंगे फूल
यहां एक साथ जो इतने फूल खिले हैं
देख के इन फूलों को मैं हर गम गया हूं भूल

सब के चेहरे पर कितनी हसीन मुस्कान है
सबको नया कुछ करना है,
सबकी उम्मीदें जवान है

यहां कौन बड़ा है कौन छोटा ,यह कहना है मुश्किल
यहां खुशियों का बस आलम है
यह दिवानों की है महफिल

आओ हम सब मिलकर ज्योत नया जलाए
अपने आस पास जो अंधकार है ,
उस अंधकार को मिटाए

आओ हम सब मिलकर करे यही आह्वान
फिर से हम बनाएंगे अपने देश को महान

हम चाहे जैसे हैं यहां,
हम खुश हैं , हम हैं मगन
हमको अपने जीवन से भी प्यार है अपना वतन

- रविन्द्र अमन (कोलकाता)
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19 घंटे पहले

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