यहां आदमी का कैसा है चक्कर
अगर किसी को कुछ मिल जाए तो,
कुछ उसकी कद्र नहीं
अगर नहीं मिले तो,वो अच्छा है,
वो है बेहतर
यहां पानी तो सबके है पास
पर इस पानी से किसी की जाती नही है प्यास
इस धरती पर यह कैसी है विडंबना
यहां किसी की चाहत का अंत नहीं,
जाने किसी मिट्टी से यह मानव बना
सबके पास तो है अपनी घरवाली
पर किसी के लिए यह दिल रहता है खाली खाली
कोई मजबूर लाचार किसी का प्यार पाकर हो गया अमीर
कोई राजा किसी की चाह में बन गया फकीर
उसी विषय पर इस दुनिया का हर लेख, हर कविता
हर गीत लिखे गए
पर इसका निकला ना कोई हल
सबके दिल को काला किया,एक गोरी का काजल
कुछ नही सब भ्रम है, सब है धुंआ
पर इस भ्रम में ही है इस जीने का मजा
कोई गरीब सुख चैन की नींद सोता है
कोई अमीर अपनी किस्मत पर रोता है
कोई अगर किसी को कुछ सुंदर दिखे तो
वो आदमी भोला भाला है
यह सुंदर लगने वाली बात, यह लुभाने वाली बात
उसने अपने अंदर पाला है
अच्छा है यह भ्रम, अगर यह भ्रम नही होता तो,
कोई अपना दुख - दर्द नहीं भुलाता
जीने की तो बात छोड़ो,
आदमी चैन से भी नहीं मर पाता
-रविन्द्र अमन
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