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मुस्कुराता रहा मेरा हिंदोस्तां

                
                                                         
                            ज़ख़्म खाता रहा मेरा हिंदोस्तां ,
                                                                 
                            
कसमसाता रहा मेरा हिंदोस्तां ।
भीष्म की तरह तीरों से छलनी बदन ,
मुस्कुराता रहा मेरा हिंदोस्तां ।।

अम्न और एकता जिसका ईमान है ,
सारे धर्मों के संगम की पहचान है ।
इसके हाथों में गीता है - क़ुरान है ,
दिल लुभाता रहा मेरा हिंदोस्तां ।।

आचरण अपने - अपने संभालो यहां ,
भाई -भाई में मत फूट डालो यहां ।
बैठ कर सारे झगड़े चुकालो यहां ,
ये सिखाता रहा मेरा हिंदोस्तां ।।

बेबसी के ये दिन भी गुज़र जाएंगे ,
बिगड़े हालात जल्दी संवर जाएंगे ।
धीरे-धीरे सभी ज़ख़्म भर जाएंगे ,
ये बताता रहा मेरा हिंदोस्तां ।।

कृष्ण-ओ-चिश्ती, नानक की जागीर है ,
दर हक़ीक़त ये जन्नत की तस्वीर है ।
कूचे - कूचे में " तनवीर - तनवीर " है ,
जगमगाता रहा मेरा हिंदोस्तां ।।

- क़ाज़ी तनवीर
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4 वर्ष पहले

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