तुम्हें देखना… बस देखना नहीं होता
ये एक अजीब सा एहसास है
जिसमें इंसान खुद को भूल जाता है
तुम्हारी आँखों में कोई जादू नहीं है
फिर भी मैं उनमें डूब जाता हूँ
जैसे डूबना ही मेरी आदत हो
तुम्हारी ख़ूबसूरती मुकम्मल नहीं है…
और शायद इसी लिए इतनी हसीन है
क्योंकि मुकम्मल चीज़ें
अक्सर इतनी महसूस नहीं होतीं
मैं तुमसे मोहब्बत करता हूँ
मगर ये मोहब्बत भी अजीब है
ना मैं इसे छुपा पाता हूँ
ना पूरी तरह कह पाता हूँ
तुम मेरे लिए ज़रूरी नहीं हो शायद…
मगर फिर भी
मैं तुम्हारे बिना खुद को समझ नहीं पाता
और अगर कभी तुम्हें लगे
कि कोई तुम्हें इस तरह देख रहा है
जैसे तुम सिर्फ एक चेहरा नहीं…
बल्कि एक पूरी दुनिया हो
तो समझ लेना…
वो मैं हूँ
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