मेंढक मामा चले बाजार |
खत्म हुआ आज आचार ll
सारा मजा हुआ बेकार l
खाना फीका बिन अचार ll
निकले घर से बिना विचार l
हुआ ना एक पल इंतजार ll
पहना जूता हुए तैयार l
करके पूरा साज श्रृंगार ll
पकड़ा छाता टोपी उतार l
चश्मा पहना लिया सिगार ll
छान मारा सारा बाजार l
मिला ना आम का आचार ll
-पुष्पा साहू मीरा
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