हां वो ही तो है जो मेरी आंखें पढ़ लिया करती है।
किसी भी इंसान की सच्चाई उसकी आंखों में होती है,
पर उसे पढ़ने वाला शख्स हर कोई नहीं होता..
पर हां एक शख्स है मेरी जिंदगी में जो मेरी आंखें पढ़ लिया करती है वह और कोई नहीं मेरी जिंदगी, मेरी जिंदगी मेरी मां हुआ करती है।....
मेरे हर दुख में जो रो दिया करती है,
वह और कोई नहीं सिर्फ और सिर्फ मेरी जिंदगी मेरी मां हुआ करती हैं।....
अपने हिस्से का भी यह कहकर कि मुझे पसंद नहीं
और मुझे खिला दिया करती है,
वह और कोई नहीं सिर्फ और सिर्फ मेरी जिंदगी मेरी मां हुआ करती है।....
जब मैं छोटी थी तो हर छोटी सी तकलीफ में रो दिया करती थी,
तब मां ही तो थी जो मुझे सीने से लगा लिया करती थी..
उसी ने तो सिखाया है हर मुश्किल का डट के सामना करना मुझे,
वह और कोई नहीं सिर्फ और सिर्फ मेरी जिंदगी मेरी मां हुआ करती है।....
उसके आंचल की ठंडी छांव ममता और प्यार के साथ-साथ उसने मुझे संस्कारों की एक पेटी भी दी है जिसे मुझे जिंदगी के हर पहलू पर संजो के रखना है..
वह उपहार कोई और ने नहीं सिर्फ और सिर्फ मेरी जिंदगी मेरी मां ने मुझे दिया है।।
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