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जिस मोड़ से चली थी,वो मोड़ भी अब मुझे न पहचाने।

                
                                                         
                            मैं अपने सपने तोड़ के कहा तक जाऊ।
                                                                 
                            
हर राह पर उसके निशा, मै कैसे मिटाऊ।
सपनो मे मेरी पूरी कहानी थी।
कहानी मे मेरी मेहनत और कुर्बानी थी।
अधूरी अब वो रह गई है, अधूरी अब मेरी तन्हाई
जिस मोड़ से चली थी,वो मोड़ भी अब मुझे न पहचाने।
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38 minutes ago

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