मैं शुक्रात नहीं ,
खुद को साबित करने केलिए
जेहर पीई सकुं .....
मैं दलाई लामा नहीं
देश छोड़ सकूं .....
ऐसे बहुत है
सभीके बारे में मुझे मालूम नहीं .....
मैं उस देश की बेटी हूं
जहां तुलसी , कबीर , दिनकर जैसे
कोई गुजर गए .....
मैं उस मिट्टी की बेटी हूं
जहां लक्ष्मी बाई , इन्दिरा , कल्पना
कोई मिट गए .....
और बहुत सारे हैं
सबकी नाम मुझे मालूम नहीं
जब एक दिन मुझे भी मिटना है
कल नहीं तो आज सही .....
लेकिन झुकना मुझे मंजूर नहीं
मैं तो बस इतना जानती हूं
झुक कर मुझे जीना नहीं .....
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X