एक प्रेमी जोड़े से मेरी,कुछ लफ्ज़ो में बात हुई
उनकी प्रेमरस बातों में,न जाने कब रात हुई
भोर हुई और दिन चढ़ आया,फिर भी थी शुरुआत हुई
एक प्रेमी जोड़े से मेरी,कुछ लफ्ज़ो में बात हुई।
कुछ कहते,फिर रुक से जाते
थोड़ा शर्माते, और मुस्काते
कहने लगे मुझसे वो पंछी,इस घर में हैं जज्बात कई
एक प्रेमी जोड़े से मेरी, कुछ लफ्ज़ों मेें बात हुई।
वचन दिया है,साथ रहेंगे
सारे सितम हम साथ सहेंगे
न जाने इन शब्दो से क्यों,दुनिया ये नाराज हुई
एक प्रेमी जोड़े से मेरी, कुछ लफ्ज़ों में बात हुई।
संग चले और बाते बहीं
जुदा किया गया प्रेम कहीं
इसी सोच से डर ही डर मे,बीत गई थी रात कई
एक प्रेमी जोड़े से मेरी, कुछ लफ्ज़ों मेंं बात हुई।
खुश हैं अब हम,संग ये पाकर
अपनी दुनिया अलग बसाकर
उनकी आँखो से चेहरे पर,फिर से एक बरसात हुई
एक प्रेमी जोड़े से मेरी, कुछ लफ्ज़ों में बात हुई ।।
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