कोमल सी एक पंखुड़ी ने,स्पर्श किया मेरे गालों को
खुशबू उसकी प्यारी सी ने,महकाया मेरे बालों को
रोम-रोम खिल गया बदन का,फूलों को हाथ लगाया जो
कोमल सी एक पंखुड़ी ने,स्पर्श किया मेरे गालों को।
गुलाब की गुलाबी थी या कमल की सादगी
हवा की आवारगी थी या चाँद की चाँदनी
सब खुश थे,देखा मैंने,खिलखिलाते तारों को
कोमल सी एक पंखुड़ी ने, स्पर्श किया मेरे गालों को।
फूलों पर भंवरे मंडरा रहे थे,और कुछ गा रहे थे
भीनी-भीनी हवा के साथ,सब गुनगुना रहे थे
मुस्कुराये मेरे होंठ,सुकून मिला मेरे कानों को
कोमल सी एक पंखुड़ी ने, स्पर्श किया मेरे गालों को।
रंग-बिरंगी तितलियों का,मिजाज ही कुछ अलग था
पर उनके साथ नन्हा-सा पौधा,बहुत ही सजग था
कोई छेड़ रहा था बार-बार,मेरे मन के तारों को
कोमल सी एक पंखुड़ी ने, स्पर्श किया मेरे गालों को।
खुशबू उसकी प्यारी सी ने, महकाया मेरे बालों को।।
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